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बिहार में रेलवे विस्तार की बड़ी योजना: 29 नई रेल लाइनों का सर्वे मंजूर, 1763 किमी नेटवर्क से बदलेगा नक्शा

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बिहार में रेलवे विस्तार को नई रफ्तार मिली है। रेलवे बोर्ड ने 29 नई रेल लाइनों के सर्वे को मंजूरी दी है, जिससे 1763 किमी का नया नेटवर्क बनेगा और कई इलाके रेल संपर्क से जुड़ेंगे।

पटना/आलम की खबर:बिहार में रेलवे नेटवर्क के ऐतिहासिक विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है, जिससे राज्य के परिवहन ढांचे में व्यापक बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। रेलवे बोर्ड ने राज्य में 29 नई रेल लाइनों के एलाइनमेंट और प्रारंभिक इंजीनियरिंग-सह-यातायात सर्वेक्षण को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्तावित योजना के तहत लगभग 1763.87 किलोमीटर लंबा नया रेल नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जो बिहार के कई ऐसे क्षेत्रों को रेल संपर्क से जोड़ेगा जो अब तक इस सुविधा से वंचित रहे हैं।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में शुरुआती तौर पर 2.67 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जैसे-जैसे सर्वे का दायरा बढ़ेगा, वैसे-वैसे बजट में भी वृद्धि की जाएगी। सर्वे पूरा होने के बाद सभी संबंधित एजेंसियां विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रेलवे मंडलों को सौंपेंगी, जिसके आधार पर निर्माण कार्य की दिशा तय की जाएगी।

रेल मंत्रालय की यह योजना बिहार में रेल कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इसका उद्देश्य राज्य के शहरी, अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को एक मजबूत रेल नेटवर्क से जोड़ना है, जिससे न केवल यात्री सुविधाएं बेहतर होंगी बल्कि व्यापार, उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नया बल मिलेगा।

प्रस्तावित रेल परियोजनाओं में मिथिला, सीमांचल, मगध और उत्तर बिहार के कई क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इनमें मधुबनी से जनकपुर रोड के बीच लगभग 50 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा नवादा से गिरिडीह के बीच सतगवां होते हुए 130 किलोमीटर रेल लाइन, कुशेश्वरस्थान से सहरसा के बीच 35 किलोमीटर की नई लाइन तथा भगवानपुर-महुआ-ताजपुर-समस्तीपुर के बीच लगभग 60 किलोमीटर रेल मार्ग का प्रस्ताव भी शामिल है।

इसके अतिरिक्त पावापुरी से नवादा, महेशखूंट से नारायणपुर, इस्लामपुर से बोधगया और बिहारशरीफ से जहानाबाद जैसे महत्वपूर्ण रूटों पर भी नई रेल लाइन के सर्वे को मंजूरी दी गई है। ये सभी परियोजनाएं लंबे समय से स्थानीय जनता की मांग रही हैं, जिन्हें अब मूर्त रूप देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इन रेल लाइनों के बनने से इन क्षेत्रों में आवागमन आसान होगा और विकास की रफ्तार तेज होने की संभावना है।

उत्तर बिहार और चंपारण क्षेत्र को जोड़ने के लिए भी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल की गई हैं। थावे-मोतिहारी-चौरादानो रेल परियोजना, चकिया-बैरगनिया रेल लाइन, अरेराज-नरकटियागंज रेलखंड और मधुबनी-कामतौल रेल मार्ग जैसी योजनाएं सीमावर्ती इलाकों के लिए बेहद अहम मानी जा रही हैं। वहीं बांका से जमुई होते हुए नवादा तक लगभग 165 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का प्रस्ताव दक्षिण बिहार के कई जिलों को सीधा लाभ पहुंचा सकता है।

इसी बीच रेलवे बोर्ड ने किऊल से झाझा के बीच तीसरी रेल लाइन के निर्माण को भी मंजूरी दे दी है। करीब 54 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर लगभग 965 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। यह लाइन दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी और इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही को और सुगम बनाएगी।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, किऊल-झाझा तीसरी लाइन बनने से रेल यातायात की क्षमता में बड़ा सुधार होगा। इससे न केवल ट्रेनों की समयबद्धता बेहतर होगी बल्कि मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के संचालन में भी सुविधा बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद इस रूट पर ट्रैफिक दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।

रेलवे के इस व्यापक विस्तार अभियान को बिहार के विकास मॉडल में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। नई रेल लाइनों के निर्माण से कई ऐसे क्षेत्र पहली बार राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे, जहां अब तक परिवहन सुविधाएं सीमित थीं। इससे न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और पर्यटन के क्षेत्र में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।

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